यदि अधिसूचना जारी हुई तो आभार रैली, वरना संघर्ष जारी: बिंदुखत्ता समिति
हल्द्वानी: बिंदुखत्ता क्षेत्र को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की लंबित मांग को लेकर बिंदुखत्ता संघर्ष समिति की बैठक में महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से शिष्टमंडल की मुलाकात के बाद हुई इस बैठक में तय किया गया कि 18 फरवरी को प्रस्तावित रैली का प्रचार-प्रसार जारी रहेगा।

समिति ने स्पष्ट किया कि यदि 18 फरवरी से पहले जिलाधिकारी द्वारा बिंदुखत्ता राजस्व गांव की अधिसूचना जारी कर दी जाती है, तो इस कार्यक्रम को “आभार रैली” में बदल दिया जाएगा। अन्यथा, रैली निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार होगी।
बैठक में भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश महामंत्री दीपेंद्र कोश्यारी का विशेष आभार जताया गया। शिष्टमंडल के अनुसार, श्री कोश्यारी ने मुख्यमंत्री के साथ करीब आधे घंटे से अधिक समय तक वन अधिकार अधिनियम (FRA 2006) के कानूनी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की और राजस्व गांव घोषणा के साथ जिलाधिकारी को निर्देश देने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए निर्देशों पर क्षेत्रवासियों ने दीपेंद्र कोश्यारी के प्रयासों की सराहना की।

बैठक की अध्यक्षता संघर्ष समिति के मुख्य संयोजक इंदर सिंह पनेरी ने की। इस दौरान मुख्यमंत्री और पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से हुई बातचीत के विवरण साझा किए गए। बैठक में वन अधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, बसंत पांडे, भाजपा मंडल अध्यक्ष नवीन पपोला, कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष पुष्कर सिंह दानू, भुवन जोशी, भरत नेगी, दीपक जोशी, प्रमोद कॉलोनी, श्याम सिंह रावत, उमेश भट्ट, कैप्टन प्रताप सिंह बिष्ट, दलबीर सिंह कफोला, डॉ. चंद्र सिंह दानू, रमेश गोस्वामी, नंदन बोरा, दीपक सिंह नेगी, गोविंद बोरा, हीरा सिंह बिष्ट और एडवोकेट बलवंत बिष्ट सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
समिति ने आगे के कार्यक्रमों पर भी निर्णय लिया। 18 फरवरी से पहले रैली संबंधी बैठकों का सिलसिला जारी रहेगा, जिसमें रैली के ज्ञापन को संघर्ष समिति के सभी पांच राजनीतिक एवं सामाजिक संगठनों के अध्यक्षों के समक्ष अंतिम रूप दिया जाएगा। साथ ही, प्रत्येक रविवार को वन अधिकार समिति के “चाय पर चर्चा” कार्यक्रम में संघर्ष समिति के सदस्य शामिल होंगे।
यह वर्षों पुरानी मांग वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक दावों की मंजूरी के बावजूद लंबित है, जिसके कारण क्षेत्र के करीब एक लाख निवासियों को भूमि मालिकाना हक, पंचायती राज व्यवस्था और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। समिति का कहना है कि आंदोलन शांतिपूर्ण लेकिन निर्णायक होगा।





