खुटानी-पहाड़पानी स्टेट हाईवे बना ‘गड्ढों का अजायबघर’, 9 करोड़ के टेंडर के बाद भी हालत बेहाल।

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कैबिनेट मंत्री के क्षेत्र की मुख्य सड़क पर भारी गड्ढे, जनता परेशान, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष ने दिया धरना का अल्टीमेटम

हल्द्वानी/ भवाली। उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में एक बार फिर सड़कों की दयनीय हालत ने आम जनता का जीना मुहाल कर दिया है। खासतौर पर खुटानी से पहाड़पानी तक जाने वाला 25 किलोमीटर का यह स्टेट हाईवे इन दिनों गड्ढों का अजायबघर बना हुआ है। यहां सड़क तो नाम मात्र की भी नहीं बची है, बल्कि हर तरफ सिर्फ गड्ढे ही गड्ढे नजर आते हैं। यह मार्ग कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा के क्षेत्र में आता है, लेकिन इसके बावजूद सड़कों का यह हाल होना क्षेत्रवासियों के लिए किसी अभिशाप से कम नहीं है।

बताया जा रहा है कि इस सड़क के निर्माण के लिए 9 करोड़ रुपए का टेंडर हो चुका है और सरकार से बजट भी स्वीकृत हो गया है, लेकिन काम अभी तक शून्य दिखता है। पीडब्ल्यूडी के भवाली के एक्जीक्यूटिव इंजीनियर कृष्ण कुमार का कहना है कि युद्ध के चलते निर्माण सामग्री के दाम बढ़ जाने से काम प्रभावित हुआ। उन्होंने दावा किया कि 15 जुलाई तक गड्ढे भरने का काम लगभग पूरा कर लिया जाएगा और अक्टूबर-नवंबर तक पूरी सड़क निर्माणाधीन हो जाएगी

लेकिन स्थानीय लोगों को इन वादों पर भरोसा नहीं हो रहा, क्योंकि पिछले कई वर्षों से यह सड़क क्षतिग्रस्त है और हर बार नई तारीखें देकर जनता को टाल दिया जाता है।

इस सड़क पर सफर करना किसी जोखिम से कम नहीं है। स्थानीय लोग बताते हैं— “अगर आप इस रास्ते से दही लेकर चलें तो पहाड़पानी पहुँचते-पहुँचते वह मठ्ठा बन जाता है।” सड़क की खराब हालत के कारण यात्रियों को कमर और शरीर में तेज दर्द की शिकायत होती है। ड्राइवर तो रोजाना दर्द निवारक दवाइयों या नशे का सहारा लेने को मजबूर है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि राज्य के सभी स्टेट हाईवे पर गड्ढे नहीं होने चाहिए, लेकिन खुटानी से लेकर पहाड़पानी तक यह मार्ग उसी वादे का मजाक लगता है। सड़क की हालत को देखते हुए स्थानीय निवासियों ने जनप्रतिनिधियों के प्रति भी आक्रोश जताया है। उनका आरोप है— “जनप्रतिनिधि महज दिखावे के लिए आते हैं, काम कोई नहीं करता।”

इधर, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल ने इस मामले को गंभीरता से उठाया है। उन्होंने कहा कि खुटानी-पहाड़पानी सड़क छड़ोंजा होते हुए जागेश्वर धाम तक जाती है, जहाँ हजारों श्रद्धालु बाबा के दरबार में आते-जाते हैं। पिछले कई वर्षों से पदमपुरी से पहाड़पानी तक सड़क इतनी खराब है कि कभी भी बड़े एक्सीडेंट की आशंका बनी रहती है।

उन्होंने कहा कि “पहले राम सिंह कैड़ा विधायक थे, समझ थी कि शायद उनसे नहीं हो पा रहा। अब तो वे कैबिनेट मंत्री हैं, फिर भी काम नहीं हो रहा। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर जल्द ही काम शुरू व पूरा नहीं हुआ और सड़क नहीं बनी तो हम धारी एसडीएम कोर्ट परिसर में अपने साथियों के साथ धरना-प्रदर्शन करेंगे।

क्षेत्र की बिगड़ती सड़क स्थिति पर जब मंत्री राम सिंह कैड़ा से उनके मोबाइल नंबर पर संपर्क करने की कोशिश की गई, तो वे बातचीत के लिए उपलब्ध नहीं हो सके। वहीं, प्रशासन और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने काम में तेजी का भरोसा दिया है, लेकिन आम जनता अब हरियाली देखना चाहती है, न कि सिर्फ वादों की बौछार।

प्रदेश के पर्वतीय जिलों की इस जीवन-रेखा को बहाल करने की मांग अब जन-आंदोलन का रूप लेती जा रही है। अब देखना यह है कि सरकार और प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता दिखाते हैं, और क्या इस बार निर्धारित समय पर सड़क वाकई बनकर तैयार हो पाती है, या यह सिलसिला इसी तरह जारी रहता है।

 पदमपुरी से पहाड़पानी के बीच की यह सड़क।

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