बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने की मांग को लेकर 20 दिसंबर को हल्द्वानी में विशाल रैली, अनिश्चितकालीन धरना जारी
हल्द्वानी/ लालकुआं।
बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन का अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन बीते 5 अक्टूबर से लगातार जारी है। आंदोलन के 21वें दिन आयोजित कोर कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से यह बड़ा निर्णय लेते हुए कहा है कि आगामी 20 दिसंबर को हल्द्वानी के रामलीला ग्राउंड में एक विशाल रैली आयोजित की जाएगी। इस रैली में बिंदुखत्ता सहित नैनीताल जिले के विभिन्न वन क्षेत्रों में निवास करने वाले सभी समुदायों के लोग बड़ी संख्या में प्रतिभाग करेंगे।
बैठक को संबोधित करते हुए वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट ने कहा कि वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत देश भर में अब तक लगभग 17,00 गांव राजस्व गांव बन चुके हैं और 2 करोड़ 32 लाख एकड़ भूमि पर लोगों को उनके अधिकार मिल चुके हैं। इसी कानून के तहत उत्तराखंड के रामनगर क्षेत्र के तीन गांवों और हरिद्वार के तीन गांवों को भी राजस्व गांव घोषित किया गया है। उन्होंने भाकपा (माले) के जिला सचिव के बयान की आलोचना करते हुए सवाल उठाया कि जब वन अधिकार अधिनियम 2006, वन अधिनियम 1980 को ओवरलैप करता है, तो फिर इंडिया गठबंधन और माले के लोग पत्रावली को केंद्र भेजने की जिद क्यों कर रहे हैं?
वन अधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी ने बैठक में प्रशासनिक और कानूनी जटिलताओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्षों से स्वर्गीय मोहन नाथ स्टेडियम के लिए जगह नहीं मिल पा रही है और लंबे समय से जनप्रतिनिधि क्रियाशाला के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि वन अधिनियम 1980 के तहत राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है, तो उत्तराखंड सरकार को लगभग 7,000 हेक्टेयर भूमि देनी होगी और 40 वर्षों तक पौधारोपण व उसके रखरखाव का जिम्मा उठाना होगा, जो व्यावहारिक रूप से असंभव है। इसी कठिनाई को देखते हुए तत्कालीन मनमोहन सरकार ने जनजातीय मंत्रालय के माध्यम से वन अधिकार अधिनियम 2006 लागू किया था, जिसके तहत बिंदुखत्ता की पत्रावली शासन स्तर पर केवल अधिसूचना जारी होने के लिए लंबित है।
संगठन के उपाध्यक्ष बसंत पांडे ने राजनीतिक दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि चाहे भाजपा हो या इंडिया गठबंधन, दोनों ही दल बिंदुखत्ता को केवल एक चुनावी मुद्दा बनाए रखना चाहते हैं ताकि वे अपनी राजनीति चमका सकें। उन्होंने कहा कि वन अधिकार संगठन, कानून के आधार पर संघर्ष करने वाला संगठन है, जिसने अपने सतत आंदोलन से सरकार को अपनी आंखें झुकाने पर मजबूर किया है। आज जब संगठन मजबूत हो रहा है, तब कुछ लोग अपने गिरते वोट बैंक और खिसकती राजनीति को बचाने के लिए जनता को गुमराह करने की साजिश रच रहे हैं।
आंदोलन की आगामी रणनीति साझा करते हुए बैठक में तय किया गया कि 20 दिसंबर को होने वाली जनसैलाब रैली में मुख्यमंत्री को स्वयं आकर बिंदुखत्ता को राजस्व गांव घोषित करने की अधिसूचना जारी करनी होगी, साथ ही संबंधित विभाग के जिम्मेदार सचिव या प्रमुख सचिव को उपस्थित रहना होगा। यदि सरकार मांग नहीं मानती है, तो संगठन देहरादून के लिए कूच करेगा।
वहीं, यदि 20 दिसंबर से पूर्व सरकार अधिसूचना जारी कर देती है, तो यह आयोजन ‘धन्यवाद रैली’ के रूप में आयोजित किया जाएगा।
आंदोलन के अंत में पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि राजनीतिक दलों ने हमेशा जनता और पूर्व सैनिकों के साथ छलावा किया है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक बीघा जमीन के लिए 7 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद वन विभाग ने जमीन राजस्व को सौंपी, लेकिन पूर्व सैनिकों को मिलने वाली यह प्रक्रिया भी अभी तक अधूरी है। उन्होंने कहा कि इस बार जनता और पूर्व सैनिक किसी भी पार्टी के बहकावे या छलावे में नहीं आएंगे तथा आंदोलन को मजबूत करने के लिए 20 दिसंबर की रैली की तैयारियां जोरों से की जाएंगी।
कोर कमेटी की इस बैठक में वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट, वन अधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी, पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, सचिव भुवन भट्ट, एडवोकेट बलवंत सिंह बिष्ट, पूर्व यूसीडीएफ अध्यक्ष भरत सिंह नेगी, पूर्व मंडल अध्यक्ष दीपक जोशी, रैली संयोजक इंदर सिंह पनेरी, स्वतंत्र वरिष्ठ पत्रकार श्याम सिंह रावत, दीपक नेगी, नंदन सिंह बोरा, बसंत पांडे, भुवन चंद शर्मा, खुशाल सिंह कोश्यारी और भूपेंद्र जोशी सहित कई प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे।





