हर मोड़ पर मौत, हर कट पर खतरा: लालकुआं -हल्दूचौड़ से गोरापड़ाव तक बना ‘मौत का हाईवे’

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लालकुआं-हल्दूचौड़ से गोरापड़ाव तक मौत का सफर, मानवाधिकार आयोग से पीयूष जोशी ने की हस्तक्षेप की मांग

हल्द्वानी। हल्दूचौड़ से गोरापड़ाव के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग 109 का लगभग 15 किलोमीटर लंबा खंड बीते कुछ वर्षों से दुर्घटनाओं का गढ़ बनता जा रहा है। इस मार्ग पर लगातार हो रही जानलेवा घटनाओं को लेकर सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ता पीयूष जोशी ने उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजकर तत्काल संज्ञान लेने की मांग की है।

जोशी का कहना है कि इस सड़क पर अनियोजित कट, अधूरी चौड़ाई, बिना संकेतक के मोड़, अंधेरे चौराहे और बेतरतीब डिवाइडर जैसे कारणों से लगातार हादसे हो रहे हैं। उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीवन और स्वतंत्रता के अधिकार का घोर उल्लंघन बताया है।

हाल ही में 17 जुलाई को हुए एक हादसे में हल्दूचौड़ निवासी 31 वर्षीय कृष्ण सिंह सैमल की ट्रक से कुचलकर मृत्यु हो गई, जबकि उनकी पत्नी और दो मासूम बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया गया कि परिवार स्कूटी से हरेला पर्व मनाने जा रहा था, तभी मामनेर घाट के पास एक अचानक सामने आए कट पर तेज रफ्तार ट्रक से टकरा गया। इससे पूर्व 13 जुलाई की रात व्यापारी दीपक जोशी की भी इसी मार्ग पर वाहन की चपेट में आने से मृत्यु हो गई थी।

पत्र में उल्लेख किया गया है कि जुलाई 2024 में नशा विरोधी अभियान से लौट रहे युवकों की स्कूटी की दुर्घटना में एक की मृत्यु हो गई थी और कई घायल हुए थे। वहीं दिसंबर 2024 में गोरापड़ाव मोड़ पर एक मालवाहक वाहन पलट गया था, जिससे चालक और एक राहगीर घायल हुए थे।

पीयूष जोशी ने इन घटनाओं को मानवाधिकार का उल्लंघन करार देते हुए कहा है कि निर्माण एजेंसियां सुरक्षा मानकों का पालन नहीं कर रहीं और जिला प्रशासन ने भी समय रहते कोई स्थायी सुधार नहीं किया। उन्होंने आरोप लगाया कि हादसों के बाद न तो पीड़ित परिवारों को कोई राहत दी गई और न ही अधिकारियों ने कोई औपचारिक जांच कराई।

उन्होंने आयोग से मांग की है कि इस मार्ग का स्थलीय निरीक्षण कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाए और लापरवाह निर्माण एजेंसियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। साथ ही प्रत्येक मृतक परिवार को ₹25 लाख और गंभीर रूप से घायल लोगों को ₹5 लाख राहत राशि देने की मांग की गई है।

जोशी ने सड़क पर स्ट्रीट लाइट, गति अवरोधक, संकेतक बोर्ड, रेलिंग और सीसीटीवी लगाने की मांग भी की है। उन्होंने यह भी कहा कि इस खंड का संपूर्ण सड़क सुरक्षा ऑडिट कराया जाए और उच्च न्यायालय में स्वतः संज्ञान याचिका की सिफारिश की जाए।

उन्होंने लिखा है कि यह केवल एक सड़क का मुद्दा नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन, स्वास्थ्य और गरिमा की रक्षा से जुड़ा विषय है। यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो आगे और निर्दोष लोग इस लापरवाही की भेंट चढ़ सकते हैं।

पीयूष जोशी ने पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी नैनीताल, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, एनएचआईडीसीएल और नैनीताल उच्च न्यायालय को भी भेजी है।


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