बिंदुखत्ता (FRA-2006) के तहत राजस्व गांव के दावे की अधिसूचना लंबित, वन अधिकार समिति ने सर्वदलीय बैठक बुलाने का निर्णय
लालकुआं। वन अधिकार समिति ने बिंदुखत्ता (FRA-2006) के तहत राजस्व गांव के दावे को शासन स्तर पर मंजूरी न मिलने पर नाराजगी जताई है। शासन में फाइल भेजे 10 माह से अधिक समय हो गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्यवाही नहीं हुई। इसे लेकर समिति ने बैठक आयोजित की, जिसमें निर्णय लिया गया कि अप्रैल माह में सर्वदलीय बैठक होगी, जहां आगे की रणनीति तय की जाएगी।

विदित हो कि बिंदुखत्ता (FRA-2006) के तहत राजस्व गांव का दावा शासन में जून 2024 से लंबित है, लेकिन वनाधिकार कानून के विपरीत इसे वन विभाग को भेजकर मामला और उलझा दिया गया है। समिति पहले ही विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष, मुख्य सचिव, राजस्व सचिव, वन सचिव से मुलाकात कर चुकी है और केंद्रीय जनजाति मंत्रालय को बार-बार पत्र भेजे गए हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला।

समिति ने बैठक में तय किया कि अब आर-पार की लड़ाई के लिए बिंदुखत्ता में सक्रिय सभी राजनीतिक और गैर-राजनीतिक संगठनों तथा उनके प्रतिनिधियों को एक मंच पर लाया जाएगा। अप्रैल में होने वाली सर्वदलीय बैठक में यदि शासन कोई निर्णय नहीं लेता है तो बिंदुखत्ता के लोग बड़ा फैसला लेने को मजबूर होंगे।

बैठक में आमंत्रित मिशन प्रबंधक, NRLM जानकी डसीला ने बताया कि बिंदुखत्ता के ग्रामों का पोर्टल पर पंजीकरण न होने के कारण महिला स्वयं सहायता समूहों के गठन की प्रक्रिया बाधित हो रही है। जबकि CDO स्तर से निर्देश दिया जा चुका है कि बिंदुखत्ता की महिलाओं को NRLM की योजनाओं से जोड़ा जाए। इस पर समिति ने निर्णय लिया कि डीएम नैनीताल से मिलकर इस समस्या का समाधान कराने की पहल की जाएगी, ताकि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

बैठक में चंचल कोरंगा, उमेश चंद्र भट्ट, कविराज धामी, विनीता बसनायत, गोविंद बोरा, कुन्दन चुफाल, हरेंद्र बिष्ट, प्रताप कोश्यारी, नन्दन बोरा, रमेश कार्की, दीपक नेगी, बलवंत बिष्ट, गणेश कांडपाल, पूरन बोरा, पूरन शाही, नवीन जोशी, दुर्गा सिंह बथ्याल, गोपाल बोरा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। जबकि बैठक की अध्यक्षता अर्जुन नाथ गोस्वामी ने की तथा संचालन सचिव भुवन भट्ट ने किया।
चित्र परिचय। बैठक में भाग लेते वन अधिकार समिति के सदस्य , अधिकारी व क्षेत्रवासी।
