सुप्रीम कोर्ट की रोक ने पुरानी प्रक्रिया रोकी, अब FRA ही बचा विकल्प

Spread the love

बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने का एकमात्र रास्ता: वनाधिकार कानून 2006

लालकुआं। बिंदुखत्ता (नैनीताल) के निवासियों की दशकों पुरानी मांग को अब मजबूत राजनीतिक समर्थन मिल रहा है। वनाधिकार समिति बिंदुखत्ता और पूर्व सैनिक संगठन बिंदुखत्ता द्वारा आयोजित वनाधिकार कानून पर प्रशिक्षण कार्यक्रम के दूसरे चरण में शिवसेना के कुमाऊं प्रमुख पुरान चंद भट्ट ने संगठन की मांग का अपनी पार्टी की ओर से खुलकर समर्थन दिया।

उन्होंने जोर देकर कहा कि बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम बनाने का अब केवल वनाधिकार अधिनियम 2006 (FRA) ही वैधानिक और व्यावहारिक मार्ग बचा है।


कार्यक्रम में केंद्र सरकार के वर्ष 2006 के उस पत्र का विस्तार से जिक्र हुआ, जिसमें सुप्रीम कोर्ट द्वारा वन ग्रामों को राजस्व ग्राम में परिवर्तित करने की प्रक्रिया पर लगाई गई रोक का स्पष्ट उल्लेख है। उसी पत्र में राज्य सरकार को सलाह दी गई थी कि वह आवश्यकता पड़ने पर सुप्रीम कोर्ट में आदेश संशोधन के लिए याचिका दायर कर सकती है।
दुर्भाग्य से, 2006 से अब तक किसी भी उत्तराखंड सरकार ने इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया। नतीजतन, बिंदुखत्ता सहित लगभग 63 गोठ खत्तों की फाइलें केंद्र स्तर पर लंबित पड़ी हैं
और पुरानी प्रक्रिया से राजस्व ग्राम बनना अब असंभव हो चुका है।


वनाधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ और सचिव भुवन भट्ट ने बताया कि FRA 2006 के तहत ग्राम सभा और जिला स्तरीय समिति (DLC) को दावों पर निर्णय लेने का पूरा अधिकार प्राप्त है। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन से सुप्रीम कोर्ट की रोक का कोई प्रभाव नहीं पड़ता और प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ सकती है। समिति ने सभी आवश्यक अभिलेख पहले ही प्रस्तुत कर दिए हैं।


संगठन का स्पष्ट मत है कि वनाधिकार कानून के अलावा कोई अन्य रास्ता अब उपलब्ध नहीं। यदि कोई व्यक्ति या पक्ष FRA के अलावा किसी दूसरे तरीके या कानून से राजस्व ग्राम बनाए जाने की बात करता है, तो वह केवल अफवाह और भ्रम फैला रहा है।वनाधिकार समिति ने ऐसे सभी लोगों को 8 फरवरी को खुले मंच पर आमंत्रित किया है। उन्होंने खुली चुनौती दी है कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद यदि कोई दूसरा वैधानिक रास्ता है, तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाए।


कार्यक्रम में पूर्व सैनिक संगठन के अध्यक्ष खिलाफ सिंह दानू, शिवसेना के कुमाऊं संयोजक पूरन चंद्र भट्ट, बसंत पांडे, चंचल कोरंगा, श्याम सिंह रावत, इंदर पनेरी, दलवीर कफोला, रंजीत गड़िया, के डी मिश्रा,सुरेश कुमार, सुरेश कुमार, कविराज धामी, उमेश भट्ट, भरत नेगी, रमेश गोस्वामी, कैलाश जोशी, भुवन शर्मा, नंदन बोरा, गोविन्द बोरा, बलवंत बिष्ट, तारा दत्त जोशी, रमेश कार्की, कुन्दन सिंह, हरेंद्र बिष्ट सहित दो दर्जन से अधिक लोग उपस्थित रहे।
बिंदुखत्ता के लोग अब निर्णायक दौर में हैं।

वनाधिकार कानून के मजबूत क्रियान्वयन और बढ़ते राजनीतिक समर्थन से इस लंबित मांग का जल्द हल निकलने की उम्मीद मजबूत हुई है।

Related Posts

प्रकृति के नाम एक घंटा : उत्तराखण्ड शासन ने 28 मार्च को ‘अर्थ अवर’ मनाने का दिया आह्वान

Spread the love

Spread the loveऑफ’ स्विच, ‘ऑन’ भविष्य : उत्तराखण्ड शासन ने 28 मार्ट को मनाने का लिया निर्णय ‘अर्थ अवर’ देवभूमि ने दी ‘अर्थ अवर’ की पुकार : 28 मार्ट को…

हाईकोर्ट ने याचिका निस्तारित की, लेकिन FRA अधिकारों पर कोई टिप्पणी नहीं – सावधान रहें गलत व्याख्या से

Spread the love

Spread the loveवन अधिकार समिति की अपील: बिंदुखत्ता को राजस्व गांव बनाने में FRA 2006 कोई बाधा नहीं लालकुआं। वन अधिकार समिति बिंदुखत्ता तथा पूर्व सैनिक संगठन ने आज एक…

Leave a Reply