IIT बॉम्बे के सहयोग से छात्र-छात्राओं ने बनाई एस्प्रिन, सीखे आधुनिक प्रयोग; प्राचार्य ने सराहा प्रयास
रानीखेत (अल्मोड़ा), संवाददाता:
पर्वतीय क्षेत्रों में विज्ञान शिक्षा को सुदृढ़ करने और प्रयोगशाला सुविधाओं के अभाव को कम करने की दिशा में राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रानीखेत ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। महाविद्यालय के रसायन विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित एक दिवसीय वर्चुअल लैब कार्यशाला ने छात्रों को डिजिटल माध्यम से प्रयोगात्मक ज्ञान प्रदान किया। इस कार्यशाला में बी.एससी. और एम.एससी. के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने IIT बॉम्बे वर्चुअल लैब इनिशिएटिव प्लेटफॉर्म पर अपना पंजीकरण किया। वर्चुअल माध्यम से उन्होंने “थिन लेयर क्रोमैटोग्राफी (TLC)”, “सैपोनिफिकेशन वैल्यू ऑफ ऑयल”, “एस्प्रिन का संश्लेषण” और “कंडक्टोमेट्रिक टाइट्रेशन” जैसे जटिल रसायन प्रयोगों को बिना किसी भौतिक रसायन या उपकरण के सफलतापूर्वक पूरा किया। यह देखकर कि पहाड़ी क्षेत्र के छात्र बिना प्रयोगशाला में खतरनाक रसायनों के संपर्क में आए प्रयोग कर रहे हैं, शिक्षकों के चेहरे खिले रहे।

महाविद्यालय के वर्चुअल लैब नोडल समन्वयक डॉ. भारत पांडेय ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में प्रायः आधुनिक प्रयोगशालाओं का अभाव रहता है, जिससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक ज्ञान नहीं मिल पाता। उन्होंने कहा, “वर्चुअल लैब इस पहाड़ी अभिशाप को समाप्त कर रही है। अब कोई भी छात्र बिना भौतिक संसाधनों के, बस एक इंटरनेट कनेक्शन के सहारे IIT बॉम्बे जैसी संस्था के प्रयोग देख और कर सकता है।”

उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र की छात्राओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म का अधिकाधिक उपयोग करने को प्रेरित किया। डॉ. पांडेय ने कहा, “बेटियां अब केमिस्ट्री के खतरनाक प्रयोगों से नहीं डरेंगी। वर्चुअल लैब में उन्हें गलती करने का भी पूरा अवसर मिलता है, जिससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है।”

कार्यशाला का कुशल संचालन रसायन विज्ञान विभाग की विभागीय वर्चुअल लैब समन्वयक डॉ. निधि शर्मा ने किया। उन्होंने विद्यार्थियों को सरल और व्यावहारिक तरीके से प्रयोगात्मक विधियों को ऑनलाइन पूरा करने का गुर सिखाया। उनके मार्गदर्शन में छात्रों ने वर्चुअल लैब में सिमुलेशन (सजीव प्रतिकृति) आधार पर प्रयोग किए और परिणाम रिकॉर्ड किए। कार्यशाला प्रश्नोत्तर सत्र के साथ संपन्न हुई, जहां छात्रों ने डिजिटल प्रयोगों से जुड़ी अपनी जिज्ञासाओं को शांत किया।

महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. पुष्पेश पांडेय ने कार्यशाला की सराहना करते हुए कहा कि आज का युग तकनीकी शिक्षा का युग है। उन्होंने कहा, “हम भाग्यशाली हैं कि IIT बॉम्बे जैसी संस्था का सहयोग मिल रहा है। वर्चुअल लैब ने केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि रिसर्च की दिशा भी दिखाई है।” प्रो. पांडेय ने डॉ. भारत पांडेय और डॉ. निधि शर्मा को उनके सराहनीय प्रयासों के लिए बधाई दी।
IIT बॉम्बे के मनीष नागोशे ने इस आयोजन पर डॉ. पांडेय और उनकी टीम की प्रशंसा करते हुए कहा कि दूरदराज के क्षेत्रों में शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ने की यह बेहतरीन मिसाल है। उन्होंने विशेष रूप से छात्राओं को अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस कार्यशाला ने साबित कर दिया है कि अब पहाड़ों में विज्ञान सीखने के लिए केवल किताबों तक सीमित रहना आवश्यक नहीं है। वर्चुअल लैब कार्यशाला ने न सिर्फ छात्रों को आधुनिक टेक्नोलॉजी से अवगत कराया, बल्कि उनके भीतर प्रयोगशाला संबंधी डर को भी समाप्त किया। कॉलेज प्रशासन ने भविष्य में इस तरह और अधिक कार्यशालाएं आयोजित करने का संकल्प लिया है।





