बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव अधिसूचना को लेकर 4 से 6 मार्च तक क्रमिक अनशन एवं विशाल जनसभा का ऐलान

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बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव अधिसूचना को लेकर 4 से 6 मार्च तक क्रमिक अनशन एवं विशाल जनसभा का ऐलान

लालकुआं। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत बिन्दुखत्ता को राजस्व गांव  की अधिसूचना जारी करने की मांग को लेकर वन अधिकार संगठन ने आगामी 4, 5 एवं 6 मार्च को क्रमिक अनशन एवं विशाल जनसभा करने का ऐलान किया है। संगठन ने इस आंदोलन में पक्ष-प्रतिपक्ष, सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रशासनिक अधिकारियों तथा सभी संगठनों के साथियों को आमंत्रित किया है।

वन अधिकार समिति के अनुसार, 18 फरवरी को ग्रामीणों ने सरकार को स्पष्ट संदेश दिया था कि बिन्दुखत्ता की अधिसूचना जारी की जाए। स्थानीय कांग्रेस व कुछ भाजपा समर्थक जनप्रतिनिधियों ने भी इस आंदोलन को सफल बनाने के भरसक प्रयास किए। क्षेत्र में आंदोलन को लेकर कम संख्या का आकलन किया गया था, लेकिन जब बिन्दुखत्तावासी सड़क पर आए तो प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन में 15,000 से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया और सरकार को अल्टीमेटम दिया कि निश्चित अवधि में राजस्व गांव की अधिसूचना जारी की जाए। इसके विपरीत सरकार ने इस दौरान ‘निर्वनीकरण’ का मामला सामने लाकर एक भ्रम की स्थिति तैयार कर दी, जिससे क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं।

वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश चंद्र भट्ट ने कहा कि अधिनियम 2006 के तहत बिन्दुखत्तावासियों के सभी साक्ष्य तर्कसंगत एवं सत्य हैं। जून 2024 में तत्कालीन जिला स्तरीय समिति की अध्यक्ष वंदना सिंह ने पत्रावली शासन को भेजी थी। तत्कालीन मुख्य सचिव राधा रतूड़ी ने भी राजस्व सचिव को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए थे। भट्ट ने कहा, “वर्ष 2026 आ गया, लेकिन पत्रावली अधिसूचना जारी करने के बजाय सरकारी तंत्र ‘केंद्र सरकार भेजने’ और ‘निर्वनीकरण’ के भ्रम में फंसाकर जिलाधिकारी के पास भेज दी जा रही है।”

ग्रामवासियों ने राहत की मांग करते हुए कहा कि वर्षों से केवल आश्वासन मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री हरिश्चंद्र दुर्गपाल ने पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी के समय से जो सड़कें बनवाई थीं, वे अब गड्ढों में तब्दील हो गई हैं। दो पहिया वाहनों के लिए ये गड्ढे मौत का कारण बन रहे हैं। विधायक और सांसद निधि से हो रहे कार्यों को छोड़कर केंद्र व राज्य की कोई जनकल्याणकारी योजना बिन्दुखत्ता तक नहीं पहुंच पा रही है।

वन अधिकार समिति के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी ने बताया कि 4 मार्च को पुरुष क्रमिक अनशन पर रहेंगे, 5 मार्च को महिलाएं अनशन करेंगी और 6 मार्च को बिन्दुखत्ता स्मारक पर विशाल जनसभा आयोजित की जाएगी। इस आंदोलन में पूर्व सैनिक संगठन भी पूरा सहयोग कर रहा है। पूर्व सैनिक संगठन अध्यक्ष के खिलाफ सिंह दानु ने कहा, “पहले देश की रक्षा की, अब अपनी भूमि के लिए लड़ेंगे। हम गोली खाने को भी तैयार हैं। यह हमारा अधिकार है और संविधान के अनुसार हम इसे मांग रहे हैं।”

वन अधिकार संगठन के उपाध्यक्ष बसंत पांडे का कहना है कि वन विभाग द्वारा लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। जहां वन विभाग बिन्दुखत्ता को रिजर्व फॉरेस्ट बताता है, वहीं विभाग के पास कोई पुख्ता कागजात नहीं हैं। उन्होंने बताया कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगे गए पत्रों पर विभाग ने असहमति जताई। बाद में सूचना आयोग के माध्यम से शपथ पत्र देकर उन्हें यह कहना पड़ा कि ‘हमारे पास कोई भी दस्तावेज नहीं है जिससे यह साबित हो कि उक्त क्षेत्र को रिजर्व फॉरेस्ट किया गया है।’ पांडे ने आरोप लगाया कि सरकार केवल बिन्दुखत्ता की जनता को गुमराह कर रही है और जनप्रतिनिधि सिर्फ मतदान के दौरान वोट पर नजर रखते हैं। उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि जहां एक ओर बिन्दुखत्ता राजस्व गांव की मांग कर रहा है, वहीं ऋषिकेश के बापू ग्राम के मामले को लेकर ग्रामवासी काफी दहशत में हैं।

स्थानीय भाजपा जनप्रतिनिधियों का कहना है कि फाइल निर्वनीकरण के लिए केंद्र सरकार भेजी जाएगी, जिससे रजिस्ट्री वाली जमीन मिलेगी, लेकिन वे यह बताने में सक्षम नहीं हैं कि यह प्रक्रिया कब तक पूरी होगी और यदि सुप्रीम कोर्ट में प्रतिकूल निर्णय हुआ तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

गौरतलब है कि देश के लगभग 1700 वन गांव राजस्व गांव में परिवर्तित हो चुके हैं और करीब 3 करोड़ 32 लाख हेक्टेयर भूमि राजस्व में आ चुकी है। ऐसे में बिन्दुखत्ता भी इसी कानून के दायरे में अधिसूचना की जोरदार मांग कर रहा है।

संगठन के पदाधिकारी प्रत्येक विद्यालय में जाकर प्रधानाचार्यों से अनुरोध कर रहे हैं कि यह प्रतियोगिता एक्स्ट्रा एक्टिविटी के तहत करवाई जाए या बच्चे घर पर लिखकर लाएं। इस प्रतियोगिता में अच्छे बैनर, पोस्टर व निबंध को प्राथमिकता दी जाएगी और 6 मार्च को शहीद स्मारक में उन्हें सम्मानित किया जाएगा। संगठन का मानना है कि बच्चा इस विषय से जुड़ेगा तो वह अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझ पाएगा और उसके माध्यम से पूरा परिवार भी इस मुद्दे से जुड़ेगा।

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