लालकुआं । वन अधिकार संगठन ने बिंदुखत्ता को राजस्व ग्राम घोषित करने की मांग को लेकर बड़ा कदम उठाया है। संगठन ने 4 से 6 मई तक आयोजित होने वाले कार्यक्रम में चर्चा के लिए मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, कमिश्नर एवं जिलाधिकारी को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है। यह आमंत्रण पत्र आज तहसीलदार लालकुआं के माध्यम से प्रशासन को भेज दिया गया।

वन अधिकार संगठन के अध्यक्ष उमेश भट्ट ने बताया कि बिंदुखत्ता में पीढ़ियों से वनाश्रित रूप से निवास करने वाले लोग वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत राजस्व ग्राम बनने की पूरी पात्रता रखते हैं, लेकिन इसकी अधिसूचना आज तक जारी नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि जिला स्तरीय समिति ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर शासन को भेज दिया था। दुर्भाग्यवश, शासन ने यह कहते हुए पत्रावली वापस कर दी कि निर्णय का अधिकार खुद डीएलसी को ही है।
इसके बाद जिलाधिकारी नैनीताल ने अधिसूचना जारी करने के बजाय सभी दावों के पुनः परीक्षण के आदेश दे दिए, जिससे पूरा प्रकरण दोबारा डीएलसी में ही अटक गया है।
शिष्टमंडल में शामिल एडवोकेट बलवंत बिष्ट ने बताया कि शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के अलग-अलग बयानों से क्षेत्र में भ्रम और भय का माहौल बना हुआ है। इसी स्थिति को देखते हुए 4, 5 व 6 मई को ‘जन-जन की सरकार—कब आएगी बिंदुखत्ता के द्वार’ कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में वनाधिकार कानून के तहत लंबित दावे पर सभी पक्षों के साथ खुली चर्चा करने का प्रस्ताव है।
इस अवसर पर अध्यक्ष उमेश भट्ट, सचिव एडवोकेट बलवंत बिष्ट, एडवोकेट भगवान सिंह माजिला, हेमंत जोशी, कैलाश चंद्र, खड़क सिंह बाफिला सहित दर्जनों ग्रामीण और कार्यकर्ता मौजूद रहे।




