सोशल मीडिया के शोर के बीच पढ़ने की उम्मीद जगाती किताब का विमोचन

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हल्द्वानी । एक ओर जहां सोशल मीडिया ने लोगों को किताबों से अलग कर केवल कॉपी पेस्ट की दुनिया में लाकर खड़ा कर दिया है तो वहीं कुछ ऐसे अध्यापक भी हुए जिन्होंने कलम को अपना संभाल कर रखते हुए कई किताबों को लिखकर सही बातों को लोगों के सामने लाने का प्रयास किया है , इसी क्रम में शिक्षक व लेखक दिनेश कर्नाटक ने अपनी नई किताब प्रतिनिधि कहानियां का विमोचन पहाड़ के सवालों पर निरंतर संघर्ष करने वाले पत्रकार राजीव लोचन साह व कुमाऊं साहित्यकार जगदीश जोशी की अध्यक्षता में एक शादे समारोह में किया किया गया । इन कहानियों से आम पाठक पहाड़ व पहाड़ के जीवन को ठीक से समझ पाएगा ।

पहाड़ के सवालों पर निरंतर संघर्षरत रहने वाले नैनीताल समाचार के संपादक राजीव लोचन शाह व कुमाउनी साहित्य में आधुनिक चेतना के वरिष्ठ साहित्यकार जगदीश जोशी जी की अध्यक्षता व मुख्य आतिथ्य में प्रतिनिधि कहानियों का विमोचन कार्यक्रम पीली कोठी स्थित नर सिंह पैलेस में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि अधिकतर साहित्यकारों को हमने दो मुंहे देखे हैं जैसा साहित्य उनका दिखता है उसके ठीक विपरीत उनका जीवन होता है लेकिन प्रतिनिधि कहानियां लेखक व शिक्षक दिनेश कर्नाटक का साहित्य व जीवन दोनों को समावेशित किया है जैसा वह लिखते हैं वैसा करते हैं , वक्ताओं ने कहा कि जहां सोशल मीडिया झूठ और आडंबरों का एक स्थान बनकर रह गया है वहीं किताब हमें सही रास्ता दिखाने के लिए आगे आ रही है। आज लोग किताब पढ़ना पसंद नहीं कर रहे हैं फिर भी ऐसी कहानी समाज से निकलकर लेखक अपने किताबों के माध्यम से सही जानकारियां लोगों तक पहुंचा रहे हैं ।आज के समय में किताब निकालना एक चुनौती है। इस चुनौती को ईमानदार साहित्यकार स्वीकार कर अपने अंदर बैठे समाज के लिए कुछ कर गुजरने का साहस उन्हें आगे बढ़ता है और वह एक और नई किताब लिख लेते हैं।

कार्यक्रम का संचालन अजीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन के भास्कर उप्रेती ने किया। उत्तराखंड मुक्त विवि के हिंदी विभागाध्यक्ष व साहित्यकार डॉ0 शशांक शुक्ल, साहित्यकार व राजकीय महाविद्यालय सोमेश्वर में प्राध्यापक डॉ0 अमिता प्रकाश ने कहानियों पर विस्तार से बात की। सर्वश्री मोहन सिंह नेगी, डॉ0 महेश बवाड़ी, डॉ0 दिनेश जोशी, जगदीश जोशी व दीपक नौगाई व नरेंद्र बंगारी आदि ने कहानियों के विभिन्न पक्षों पर बात की। उत्तराखंड के जन-जीवन, संस्कृति व साहित्य पर महत्वपूर्ण किताबें छाप रहे ‘समय साक्ष्य’ ने इस अवसर पर एक पुस्तक प्रदर्शनी का आयोजन किया। अजीम प्रेमजी फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शहर के साहित्यकार, पत्रकार, समाजसेवी, नागरिक तथा बड़ी संख्या में शिक्षक समाज के लोगों की उपस्थिति रही।

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