“धार्मिक स्थलों पर VIP तंत्र हावी, आम श्रद्धालु अपमानित क्यों?”

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बद्रीनाथ धाम में VIP संस्कृति से भड़की जनभावना: मातृ सदन ने मुख्यमंत्री को घेरा, संतों के अपमान पर जताई तीव्र आपत्ति

हरिद्वार/बद्रीनाथ, 6 मई 2025।
चारधाम यात्रा के शुभारंभ पर बद्रीनाथ धाम में वीआईपी संस्कृति के कारण उत्पन्न अव्यवस्था को लेकर आध्यात्मिक संस्था मातृ सदन ने राज्य सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। संस्था ने उत्तराखंड के माननीय मुख्यमंत्री और राज्यपाल को पत्र लिखकर पूज्य संतों के अपमान, आम श्रद्धालुओं की उपेक्षा और धार्मिक स्थलों के राजनीतिक मंच बनने पर गहरी चिंता जताई है।

4 मई को कपाट खुलने के दिन परम पूज्य गुरुदेव स्वामी श्री शिवानंद जी महाराज और अनेक श्रद्धालु बद्रीनाथ धाम के दर्शन के लिए पहुँचे थे। लेकिन प्रशासनिक अव्यवस्था, वीआईपी संस्कृति और सुरक्षा में भेदभाव के कारण भारी अफरातफरी मच गई। श्री शिवानंद जी महाराज भगदड़ जैसी स्थिति में गिर पड़े, जो न केवल एक संत, बल्कि संपूर्ण संत परंपरा और सनातन संस्कृति का अपमान है।

साध्वी पद्मावती जी के साथ अमानवीय व्यवहार

मातृ सदन द्वारा जारी पत्र में बताया गया कि साध्वी पद्मावती जी, जो गंगा संरक्षण के लिए वर्षों अनशन पर रहीं और शारीरिक रूप से दुर्बल हैं, दर्शन हेतु पहुंचीं, लेकिन पुलिसकर्मी विशेषकर निरीक्षक कुकरेती द्वारा उन्हें न केवल रोका गया, बल्कि अपमानजनक शब्दों का प्रयोग कर एक तपस्विनी की मर्यादा को रौंदने का प्रयास किया गया।

अव्यवस्था इतनी भयावह थी कि साध्वी जी को अपने साथियों को गोद में उठाकर भीड़ के बीच सीढ़ियों पर चढ़ाना पड़ा। मातृ सदन ने इसे केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि धार्मिक मूल्यों और संत गरिमा का घोर अपमान कहा है।

मातृ सदन की प्रमुख माँगें:

  • निरीक्षक कुकरेती को तत्काल निलंबित कर उनके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।
  • स्वामी शिवानंद जी और साध्वी पद्मावती जी से प्रशासन द्वारा सार्वजनिक क्षमा याचना की जाए।
  • सभी संतों और वरिष्ठ श्रद्धालुओं के लिए सम्मानजनक, संरक्षित एवं समान दर्शन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
  • VIP संस्कृति का पूर्ण रूप से बहिष्कार कर सभी को समान अधिकार दिए जाएँ।

“धार्मिक स्थल किसी VIP की निजी जागीर नहीं”

मातृ सदन ने साफ शब्दों में कहा है कि मुख्यमंत्री राज्य को एक VIP अड्डा और राजनीतिक नाटक मंच बना रहे हैं, जो उत्तराखंड की ऋषि परंपरा और सनातन संस्कृति का अपमान है। पत्र में यह भी कहा गया कि चारधाम यात्रा की तथाकथित तैयारी केवल कागज़ों में है। सड़कें टूटी हुई हैं, अलकनंदा में जहरीली पोकलैंड मशीनें चल रही हैं और पूरे मार्ग में गंदगी व अव्यवस्था है।

धर्मस्थलों को VIP संस्कृति से मुक्त करना आवश्यक

यह स्पष्ट है कि यदि मंदिरों और सार्वजनिक तीर्थस्थलों पर भी समानता और गरिमा नहीं होगी, तो यह केवल धर्मस्थलों का राजनीतिककरण कहलाएगा। मातृ सदन की ओर से दिया गया यह संदेश आज उस जन असंतोष को दर्शाता है, जो अब धर्म के नाम पर भेदभाव और व्यवस्था की लापरवाही को सहन नहीं करना चाहता


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