बलसुना व गैलाकोट ने दिखाई एकता, वन अधिकार के लिए की कानूनी पहल

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बलसुना व गैलाकोट के ग्रामीणों ने वन अधिकार अधिनियम के तहत सामुदायिक वन अधिकार की मान्यता के लिए प्रस्तुत किया दावा
15 मई, भनोली (अल्मोड़ा)

बलसुना और गैलाकोट ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों ने वन अधिकार अधिनियम 2006 के अंतर्गत सामुदायिक वन अधिकार की मान्यता प्राप्त करने हेतु औपचारिक दावा प्रस्तुत किया है। यह दावा ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति के माध्यम से उप खंड स्तरीय वन अधिकार समिति भनोली और उपजिलाधिकारी भनोली को सौंपा गया।

ग्रामीणों ने बताया कि वे वर्षों से पारंपरिक और सांस्कृतिक रूप से वनों का संरक्षण, संवर्धन और सतत उपयोग करते आ रहे हैं। इस सिलसिले में ग्राम सभाओं में प्रस्ताव पारित कर सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित सामुदायिक दावा प्रस्तुत किया गया है। पत्र में कहा गया है कि स्थानीय ग्रामीण वन क्षेत्रों के प्राकृतिक संसाधनों का नियमित और पारंपरिक उपयोग करते हैं और वे अधिनियम की धारा 3(1) के अंतर्गत सामुदायिक वन अधिकार के पात्र हैं।

ग्राम समिति ने अपील की है कि उनके दावे को स्वीकारते हुए अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार उन्हें विधिवत मान्यता दी जाए, ताकि वे अपने परंपरागत अधिकारों का उपयोग करते हुए वनों के संरक्षण और सामुदायिक भागीदारी को और प्रभावी बना सकें।

इसके अतिरिक्त यह भी निवेदन किया गया है कि भविष्य में भी ग्रामवासियों की भागीदारी से वन संसाधनों के उपयोग और प्रबंधन संबंधी निर्णय लिए जाएं, जिससे अधिनियम की भावना के अनुरूप स्थानीय समुदाय सशक्त हो सके।

दावे पर ग्राम स्तरीय वन अधिकार समिति बलसुना व गैलाकोट के अध्यक्ष पान सिंह बिष्ट, सचिव गजेन्द्र सिंह बिष्ट सहित 15 सदस्यों ने हस्ताक्षर कर अपनी सहमति जताई। और दावे का प्रार्थना पत्र उप जिलाधिकारी को प्रेषित किया। ज्ञापन देने वालों में समाजसेवी बसंत बल्लभ पांडे, वन अधिकार समिति के अध्यक्ष पान सिंह बिष्ट , सचिव गजेन्द्र सिंह बिष्ट सामिल थे।

स्थानीय लोगों के पारम्परिक अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।


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