ठेकेदार के भरोसे बर्बादी की कगार पर सब कांट्रेक्टर, करोड़ों की रकम बकाया – विधायक पुत्र पर गंभीर आरोप

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ठेकेदार के भरोसे बर्बादी की कगार पर सब कांट्रेक्टर, करोड़ों की रकम बकाया – विधायक पुत्र पर गंभीर आरोप

बकाया भुगतान न मिलने पर बच्चों के साथ सड़क पर उतरे सब कांट्रेक्टर, बोले – न्याय नहीं मिला तो आत्महत्या करेंगे

रिपोर्टर – मुकेश कुमार
स्थान – हल्द्वानी


हल्द्वानी में उस वक्त गहमागहमी का माहौल बन गया जब प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत कौन्ता–पटरानी मोटर मार्ग का निर्माण कार्य करने वाले सब कांट्रेक्टर अपने छोटे-छोटे बच्चों व परिवार सहित सड़क पर धरने पर बैठ गए

आरोप बेहद गंभीर हैं – ठेकेदार सुंदर अधिकारी, जिनके बारे में प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह लोहाघाट विधायक के पुत्र हैं, काम कराने के बाद गायब हो गए और सब कांट्रेक्टरों को करोड़ों की रकम अब तक नहीं मिली


“ठेकेदार के घर के 50 से ज्यादा चक्कर काट चुके, अब बच्चों का पेट पालना मुश्किल”

सब कांट्रेक्टरों ने कहा,

“हमें करीब 8 महीने हो चुके हैं भुगतान के इंतजार में। करोड़ों रुपये बकाया हैं। कई कांट्रेक्टरों का 70–80 लाख तक फंसा है। अब न बैंक पैसा दे रहा है, न घर चल रहा है। इसलिए मजबूरी में अपने मासूम बच्चों को लेकर ठेकेदार के घर पर धरना देना पड़ा।”

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ठेकेदार का रसूख इतना है कि कोई अधिकारी खुलकर कार्रवाई नहीं कर रहा। लोहाघाट विधायक के बेटे होने के नाते संरक्षण का दुरुपयोग हो रहा है।


प्रशासन को दी शिकायत, अब तक कोई राहत नहीं

धरना दे रहे सब कांट्रेक्टरों ने एसडीएम हल्द्वानी को भी लिखित शिकायत सौंपी है, जिस पर एसडीएम ने श्रम विभाग व संबंधित विभागीय अधिकारियों को जांच के निर्देश दिए हैं। हालांकि धरना देने वालों का कहना है कि अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।


“यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो करेंगे बड़ा कदम” – चेतावनी

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कहा कि

“यदि ठेकेदार से बकाया रकम नहीं मिली और प्रशासन मौन रहा, तो हम आत्महत्या जैसे कदम उठाने को मजबूर होंगे।”

उन्होंने साफ कहा कि यह केवल उनका आर्थिक मामला नहीं, उनके बच्चों के भविष्य और पूरे परिवार के जीवन-मरण का प्रश्न बन चुका है।


🟥 यह है एक सवाल लोकतंत्र से – क्या रसूख कानून से ऊपर है?

जब एक आम नागरिक महीनों काम करने के बाद भी अपनी मेहनत की कमाई के लिए सड़क पर बैठने को मजबूर हो, और किसी विधायक का बेटा आरोपों के घेरे में हो कर भी कानून से ऊपर नजर आए, तो यह न केवल स्थानीय प्रशासन, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक चेतावनी है।


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