बिंदुखत्ता वन अधिकार समिति ने शासन की कार्रवाई पर जताई गंभीर आपत्ति, राज्य निगरानी समिति से जांच में शामिल करने की मांग

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वन अधिकार अधिनियम के तहत बिंदुखत्ता फाइल लंबित: समिति ने राज्य निगरानी समिति से जांच में शामिल करने की अपील की

लालकुआं। बिंदुखत्ता वन अधिकार समिति ने वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) 2006 के नियमों के विपरीत शासन द्वारा 16 माह तक लंबित रखने के बाद फाइल को जिला स्तरीय समिति को वापस भेजे जाने की कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई है।

समिति ने राज्य स्तरीय निगरानी समिति के अध्यक्ष के नाम ज्ञापन की प्रति तहसीलदार को सौंपी। इसमें आपत्तियों के निराकरण के दौरान बिंदुखत्ता वन अधिकार समिति को शामिल करने की मांग की गई है।तहसील परिसर में एकत्रित समिति सदस्यों ने कहा कि जिला स्तरीय समिति द्वारा 18 माह पहले शासन को भेजी गई फाइल में केवल राजस्व गांव की अधिसूचना जारी होना शेष था।

शासन ने अधिसूचना जारी करने के बजाय फाइल जिलाधिकारी को वापस भेज दी। नए जिलाधिकारी ने इसमें आपत्तियां दर्ज कर दीं, जो वन अधिकार अधिनियम 2006 के पूरी तरह विपरीत हैं।समिति ने राज्य निगरानी समिति से आग्रह किया है कि आपत्तियों के निस्तारण और पूरे मामले की जांच के दौरान बिंदुखत्ता वन अधिकार समिति को शामिल किया जाए, ताकि ग्रामवासियों की वास्तविक स्थिति व साक्ष्य सामने आ सकें और अधिकारियों को अधिनियम की सही जानकारी मिल सके।

राज्य निगरानी समिति को पूर्व में आपत्ति दर्ज कर निराकरण के लिए पत्र प्रेषित किया गया था, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं होने से लोगों में गहरी नाराजगी है।ज्ञापन तहसीलदार लालकुआं के माध्यम से राज्य स्तरीय निगरानी समिति को प्रेषित किया गया।

इस अवसर पर बसंत पांडे, कैप्टन चंचल सिंह कोरंगा, एडवोकेट बलवंत सिंह बिष्ट, नंदन सिंह बोरा, नवीन जोशी और एडवोकेट भगवान सिंह माजिला सहित कई बिंदुखत्ता वासी उपस्थित रहे।बिंदुखत्ता के हजारों निवासी लंबे समय से राजस्व गांव का दर्जा मांग रहे हैं, ताकि उन्हें भूमि अधिकार और सरकारी सुविधाओं का लाभ मिल सके।

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