बिंदु खत्ता में FRA 2006 पर प्रशिक्षण कार्यक्रम: वन अधिकारों की बारीकियां समझाई गईं

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लालकुआं । वन पंचायत संघर्ष समिति के तत्वावधान में बिंदु खत्ता एवं आसपास के वन क्षेत्रों के ग्रामीणों ने वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के नियमों, प्रावधानों तथा अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों (FAQs) पर विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग लिया। इस दौरान लालकुआं विधानसभा क्षेत्र से जुड़े बिंदुखत्ता, दानी गौलापार, बागवाला, दानीबंगर, बाग जाला, सुल्तान नगरी सहित अन्य गांवों के प्रतिनिधि बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में वन पंचायत संघर्ष समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष एडवोकेट तरुण जोशी ने FRA एक्ट की बारीकियां विस्तार से समझाईं। उन्होंने विशेष रूप से जनजाति मामलों के मंत्रालय द्वारा 08/11/2013 को जारी महत्वपूर्ण दिशानिर्देशों के पत्र का जिक्र किया, जो सभी राज्यों के मुख्य सचिवों तथा वन अधिकार राज्य स्तरीय निगरानी समिति के अध्यक्षों को भेजा गया था।


एडवोकेट जोशी ने कहा, “यदि देश-प्रदेश के संबंधित अधिकारी इस 08/11/2013 के पत्र को ध्यान से पढ़कर अमल में लाते, तो उत्तराखंड में सामूहिक (Community Forest Rights – CFR) तथा व्यक्तिगत दावों के साथ-साथ कई वन गांवों को राजस्व गांवों में परिवर्तित किया जा सकता था। यह पत्र वन गांवों, पुरानी बस्तियों, असर्वेक्षित गांवों आदि को धारा 3(1)(h) के तहत राजस्व गांवों में बदलने की स्पष्ट प्रक्रिया, दिशानिर्देश तथा स्पष्टीकरण प्रदान करता है।”


उन्होंने बताया कि FRA 2006 के तहत वनवासी अनुसूचित जनजातियां (STs) तथा अन्य पारंपरिक वनवासी (OTFDs) को वनों पर ऐतिहासिक अधिकार मिलते हैं, जिनमें व्यक्तिगत भूमि अधिकार (अधिकतम 4 हेक्टेयर), सामुदायिक अधिकार, लघु वन उत्पाद संग्रह, चराई, तथा वन गांवों का राजस्व गांव में रूपांतरण शामिल है।


कार्यक्रम का संचालन वन अधिकार समिति के सचिव भुवन भट्ट तथा श्याम सिंह रावत ने किया। उन्होंने अधिनियम तथा नियमों को पढ़कर सुनाया, जबकि एडवोकेट तरुण जोशी ने सभी प्रावधानों पर विस्तारपूर्वक जानकारी दी तथा दावों की प्रक्रिया, साक्ष्यों तथा अपील के तरीकों पर चर्चा की।


प्रशिक्षण में वन अधिकार समिति बिंदुखत्ता के अध्यक्ष अर्जुन नाथ गोस्वामी , बसंत पांडे, चंचल सिंह कोरंगा, संध्या डालाकोटी, इन्द्र सिंह पानेरी, डीके मिश्रा, रमेश गोस्वामी, जीत सिंह ठकुरना, कविराज धामी, गोपाल लोधियाल, दलवीर कपोला, राम सिंह चिलवाल, हमारे सिंह नयाल, कुन्दन सिंह, हर्षित बिष्ट सहित कई अन्य प्रतिनिधियों ने सक्रिय भागीदारी की।


यह कार्यक्रम FRA 2006 के बेहतर कार्यान्वयन तथा उत्तराखंड के वन क्षेत्रों में लंबित दावों को तेज करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रतिभागियों ने मांग की कि राज्य सरकार 08/11/2013 के दिशानिर्देशों का पालन कर वन गांवों को राजस्व गांव बनाने की प्रक्रिया तेज करे, ताकि स्थानीय समुदायों को उनके संवैधानिक अधिकार मिल सकें।

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