आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की बैठक: हल्द्वानी में जल संरक्षण और किसानों की आय दोगुनी पर जोर,जलवायु परिवर्तन और हिमपात की कमी के बीच प्राकृतिक संरक्षण पर फोकस

हल्द्वानी,
नैनीताल जिले के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की अध्यक्षता में हल्द्वानी कैम्प कार्यालय में स्प्रिंग एवं रिवर पुनरुद्धार प्राधिकरण (सारदा – SAARA), उत्तराखंड जलवायु अनुकूल वाराही कृषि परियोजना तथा रीप परियोजना की महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब उत्तराखंड में इस सर्दी में हिमपात और सर्दियों की बारिश लगभग शून्य रही है, जिसे विशेषज्ञ ‘स्नो ड्राउट’ (snow drought) कह रहे हैं। दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक राज्य में 100% वर्षा/हिमपात की कमी दर्ज की गई है – यह 1985 से अब तक की सबसे खराब स्थिति है। इससे झरने, नदियाँ, भूजल स्तर और अमृत सरोवर प्रभावित हो रहे हैं, जबकि जंगलों में आग लगने की घटनाएँ पहले ही शुरू हो चुकी हैं।
परियोजनाओं का मुख्य लक्ष्य: किसानों की आय दोगुनी और जल संकट से निपटना
जिलाधिकारी ने बैठक में स्पष्ट किया कि इन परियोजनाओं का सर्वोच्च उद्देश्य जनपद में किसानों की आय को दोगुना करना है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार बढ़ाना, जल स्रोतों का संरक्षण एवं संवर्धन तथा मौसम के अनुकूल परंपरागत कृषि को मजबूत करना प्रमुख लक्ष्य हैं।
उन्होंने निर्देश दिए कि मौसम अनुकूल क्षेत्रों में उन्नत प्रजाति के बीजों का उपयोग बढ़ाया जाए ताकि उत्पादन में वृद्धि हो। यह कदम जलवायु परिवर्तन से प्रभावित रबी फसलों और कृषि को बचाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
प्राकृतिक तरीकों पर जोर: सीमेंट-कंक्रीट पर पूर्ण प्रतिबंध
जल संरक्षण एवं संवर्धन के कार्यों में सीमेंट-कंक्रीट का बिल्कुल उपयोग न किया जाए – केवल कच्चे (प्राकृतिक) कार्य ही हों। चौड़ी पत्ती वाले पौधों का अधिकाधिक रोपण सुनिश्चित किया जाए, जो जंगलों में नमी बनाए रखने और वनाग्नि रोकने में मदद करेगा।
नए भवनों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग अनिवार्य होगी तथा वर्षा जल संग्रहण के लिए टैंकों का निर्माण किया जाएगा ताकि भूजल स्तर बढ़ाया जा सके।
प्राकृतिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन और जन भागीदारी
अमृत सरोवरों की गुणवत्ता सुधार, धारे-नौलों का संरक्षण तथा प्राकृतिक शैली में जल स्रोतों का पुनर्जीवन प्राथमिकता पर रहेगा। जल संचयन, जन भागीदारी और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भूमिका को मजबूत किया जाए।
ड्रिप एवं स्प्रिंकलर जैसी जल-कुशल सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाए तथा फ्लड इरिगेशन को कम किया जाए – यह कम पानी में अधिक उत्पादन सुनिश्चित करेगा।
परियोजनाओं की प्रगति और बजट आवंटन
उप निदेशक जलागम परियोजना ने बताया:
लघु सिंचाई विभाग के तहत 37 रिचार्ज साफ्ट एवं 10 रिचार्ज पिट हेतु 36.44 लाख रुपये अवमुक्त।
भालूगाड़ जल प्रपात रिचार्ज हेतु 1 करोड़ 32 लाख रुपये (वन विभाग, भूमि संरक्षण, धारी एवं रामगढ़)।
नैनीताल में शिप्रा नदी पुनर्जीवन हेतु 66.15 लाख रुपये।
उत्तराखंड जलवायु अनुकूल वाराही कृषि परियोजना अंतर्गत 77 ग्राम पंचायतों के 180 राजस्व गांवों में कार्ययोजना तैयार।
आत्मनिर्भरता सर्वोच्च प्राथमिकता
जिलाधिकारी ने जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी, उप निदेशक जलागम डॉ. एस. के उपाध्याय सहित सभी अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने जोर दिया कि इन परियोजनाओं से लाभार्थियों के जीवन स्तर में सुधार लाते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
यह बैठक जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न स्नो ड्राउट, सूखे और वनाग्नि के बीच उत्तराखंड के लिए एक प्रोएक्टिव कदम है, जो प्राकृतिक संरक्षण से जल संकट और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।





