घुघुतिया त्योहार में वेटलैंड एवं फिन्स बाया (बुनकर पक्षी)संरक्षण पर जोर, संजय वन में भव्य आयोजन

Spread the love

घुघुतिया त्योहार में वेटलैंड एवं फिन्स बाया (बुनकर पक्षी)संरक्षण पर जोर, संजय वन में भव्य आयोजन

उधम सिंह नगर, 19 जनवरी 2026: कुमाऊं एवं गढ़वाल का प्रसिद्ध घुघुतिया त्योहार (मकर संक्रांति का स्थानीय रूप) इस बार पर्यावरण संरक्षण से जुड़ा हुआ रहा। संजय वन (उधम सिंह नगर) में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में वेटलैंड्स एवं फिन्स बाया (बुनकर पक्षी)जैसी दुर्लभ प्रवासी चिड़िया के संरक्षण पर विशेष जागरूकता फैलाई गई। क्षेत्र के दर्जनों विद्यालयों के उत्साही विद्यार्थियों, वन विभाग के अधिकारियों एवं स्थानीय समुदाय ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ उधम सिंह नगर के जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने किया। उन्होंने कहा, “प्रकृति में हम सब एक साथ हैं। यदि हम एक-दूसरे का साथ नहीं देंगे तो इकोसिस्टम गड़बड़ा जाएगा, जिससे महामारी एवं अन्य गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों से हम नई पीढ़ी को सिखाते हैं और पर्यावरण संतुलन में अपनी भूमिका निभाते हैं।”
नेचर साइंस इनिशिएटिव की डॉ सौम्या प्रसाद ने विस्तार से बताया कि उधम सिंह नगर की वेटलैंड् उत्तराखंड का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन यहां एंक्रोचमेंट (अतिक्रमण), पास में खेती एवं अन्य गतिविधियों से इकोसिस्टम प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा, “जैसे डॉक्टर हमारी बीपी और सांस से स्वास्थ्य बताते हैं, वैसे ही चिड़ियां हमें जमीन की सेहत के बारे में बताती हैं। वर्तमान में वुडलैंड (वन क्षेत्र) में ग्रोथमेंट बढ़ रहा है, जिससे आने वाले समय में पानी की बड़ी समस्या हो सकती है। नेचर और कल्चर हमारे यहां एक साथ हैं। घुघुतिया त्योहार केवल उत्तराखंड में ही चिड़ियों का त्योहार के रूप में मनाया जाता है, और हम इसे पूरे विश्व तक पहुंचाना चाहते हैं।”
यह त्योहार पारंपरिक रूप से कुमाऊं में कौवों को घुघुते खिलाकर मनाया जाता है, जो प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक है। इस अवसर पर बच्चों ने नेचर पर आधारित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिसमें गीत, नृत्य एवं नाटक के माध्यम से पर्यावरण संदेश दिए गए। दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए।
वन विभाग के अधिकारियों ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि वे हर संभव ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता फैलाते रहेंगे तथा पर्यावरण एवं इकोसिस्टम को बनाए रखने में अपनी भूमिका निभाएंगे।
यह भी बताया गया कि तराई क्षेत्र में गर्मी के मौसम में पानी की अधिक खपत वाली फसलों पर सरकार ने रोक लगाई है, जो भविष्य में पानी की कमी की समस्या को रोकने में मददगार साबित होगी।

कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी उधम सिंह नगर दिवेश शासनी, डीएफओ उमेश तिवारी, सांसद प्रतिनिधि लक्ष्मण सिंह खाती, उप प्रभागीय वन अधिकारी किच्छा श्रीमती शशि देव वन क्षेत्राधिकारी टांडा रूपनारायण गौतम डॉ. रमन कुमार, मुकेश कांडपाल, अपूर्ण जोशी, पूजा बिष्ट, डीएस नेगी, दिग्विजय सिंह, डॉ. कमलेश अटवाल, ओम प्रकाश, शेर सिंह कोरंगा, वर्षा जोशी, जगदीश पांडे, पूजा बिष्ट एवं युवराज सिंह खाती सहित कई अधिकारी एवं क्षेत्रवासी उपस्थित रहे।

यह आयोजन उत्तराखंड में संस्कृति एवं संरक्षण को जोड़ने का एक अनुपम उदाहरण साबित हुआ, जो आने वाले समय में और बड़े स्तर पर फैल सकता है।
“घुघुतिया त्योहार: चिड़ियों से सीखें, वेटलैंड् बचाएं – प्रकृति का संतुलन बनाए रखें!”

Related Posts

रसायन-मुक्त दूध की मिसाल बने मुकेश बोरा! केंद्रीय मंत्री अजय टम्टा ने दिया विशेष सम्मान

Spread the love

Spread the love मुकेश बोरा को ‘केमिकल फ्री मिल्क अवार्ड’: नैनीताल दुग्ध संघ की शानदार उपलब्धि, किसानों की मेहनत का सम्मान नैनीताल/लालकुआँ, 17 जनवरी 2026: सरोवर नगरी नैनीताल की हसीन…

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की बैठक: हल्द्वानी में जल संरक्षण और किसानों की आय दोगुनी पर जोर,जलवायु परिवर्तन और हिमपात की कमी के बीच प्राकृतिक संरक्षण पर फोकस

Spread the love

Spread the love आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था सर्वोच्च प्राथमिकता जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की बैठक: हल्द्वानी में जल संरक्षण और किसानों की आय दोगुनी पर जोर,जलवायु परिवर्तन और हिमपात की कमी…

Leave a Reply