IMD का ऑरेंज अलर्ट सही साबित: 23 जनवरी 2026 को उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल-पौड़ी में 8-12 सेमी बर्फ, बारिश से ठंड बढ़ी

देहरादून/नैनीताल/पौड़ी गढ़वाल, 23 जनवरी 2026: उत्तराखंड के उच्च हिमालयी इलाकों में आज वसंत पंचमी के मौके पर सीजन की पहली प्रमुख बर्फबारी हुई है, जो पिछले कई हफ्तों के सूखे और जंगल की आग की घटनाओं के बाद एक बड़ी राहत लेकर आई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, जिसमें उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, नैनीताल, पौड़ी गढ़वाल और बागेश्वर जैसे जिलों में भारी बर्फबारी और बारिश की चेतावनी दी गई है।उच्च क्षेत्रों में 8-12 सेमी तक बर्फ जमा हो सकती है, जबकि निचले इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश से तापमान में तेज गिरावट आई है। यह बर्फबारी पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हुई है, जो जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड को प्रभावित कर रहा है।
उत्तराखंड के लोकप्रिय पर्यटन स्थलों जैसे मसूरी, धनौल्टी, औली, चकराता, चोपता, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। मौसम विभाग की वेबसाइट वेबसाइट वेबसाइट पर साझा वीडियो और तस्वीरों से पता चलता है कि मसूरी और धनौल्टी में बर्फ की मोटी परत जमी है, जिससे इलाका सफेद चादर से ढक गया है। नैनीताल जिले के मुक्तेश्वर और अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में भी पहली बर्फबारी हुई, जहां स्थानीय निवासी और पर्यटक खुशी से झूम उठे। पौड़ी गढ़वाल के थलीसैन और चोपता क्षेत्रों में बर्फ ने पहाड़ों को और खूबसूरत बना दिया है।
हालांकि, बर्फबारी की खबर फैलते ही पर्यटकों की भारी भीड़ से देहरादून-मसूरी रोड पर ट्रैफिक जाम हो गया, और कई जगहों पर वाहन फिसलने की घटनाएं हुईं। उत्तराखंड पुलिस ने सड़कों पर बर्फ हटाने का काम शुरू कर दिया है और यात्रियों को धीमी गति से चलने की सलाह दी है। हल्द्वानी जैसे निचले इलाकों में बारिश से ठंड बढ़ी है, और दृश्यता कम होने से यात्रा में सावधानी बरतने की जरूरत है।
जनवरी के शुरुआती हफ्तों में सूखे मौसम के कारण पौड़ी गढ़वाल, नैनीताल और चमोली जिलों में जंगल की आग की सैकड़ों घटनाएं हुईं, जिसमें फूलों की घाटी के पास बड़े पैमाने पर जंगल प्रभावित हुए। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, उत्तर-पश्चिमी हिमालय में 2021-2026 के दौरान बर्फबारी औसत से 25% कम रही है, जैसा कि ICIMOD की 2024-2025 रिपोर्ट में बताया गया है। इससे ग्लेशियरों का पिघलना तेज हुआ और पानी की कमी बढ़ी। पत्रकार हृदयेश जोशी की फेसबुक पोस्ट में भी यही बात उजागर की गई थी कि बर्फबारी की कमी से हिमालयी क्षेत्र में पारिस्थितिकी संतुलन बिगड़ रहा है—बर्फ ग्लेशियरों को इंसुलेशन की तरह बचाती है, जैसे हमारी त्वचा को कपड़े। अब यह बर्फबारी आग को नियंत्रित करने और ग्लेशियरों को सुरक्षा प्रदान करने में मदद करेगी, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन से ऐसी घटनाएं अनियमित हो रही हैं। 1980-2020 के औसत की तुलना में हाल के वर्षों में बर्फबारी में 23-24% की गिरावट आई है, जो 23 सालों का न्यूनतम स्तर है।
IMD के अनुसार, आज रात तक बर्फबारी जारी रह सकती है, लेकिन 24 जनवरी को मौसम में सुधार होगा। हालांकि, 26-27 जनवरी को एक और पश्चिमी विक्षोभ के कारण फिर से बारिश और बर्फबारी हो सकती है।उच्च क्षेत्रों में तापमान -1°C से -7°C तक गिर सकता है, जबकि मैदानी इलाकों में ठंडी हवाएं और ओलावृष्टि की संभावना है।पर्यटकों को IMD अपडेट्स चेक करने और सुरक्षित यात्रा करने की सलाह दी जा रही है।
यह बर्फबारी न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि पर्यावरण संतुलन को भी मजबूत करेगी। लेकिन लंबे सूखे की पृष्ठभूमि में, हमें वन संरक्षण, कार्बन उत्सर्जन कम करने और सतत विकास पर ध्यान देना होगा ताकि हिमालय की सुंदरता बनी रहे। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह “बर्फीला वसंत” उम्मीद की नई किरण है।






