जंगली जानवरों व बंदरों से इंसानों, फसलों व मवेशियों को सुरक्षा दो।

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जन सम्मेलन में आप सादर आमंत्रित हैं!

महोदया/महोदय,

उत्तराखंड व आसपास के क्षेत्रों में जंगली जानवरों का आतंक चरम पर है। जंगली जानवरों के हमलों की घटनाएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही हैं। कार्बेट पार्क से सटे क्षेत्रों में पिछले कुछ दिनों में टाइगर द्वारा महिलाओं समेत आधा दर्जन से अधिक लोगों को मार दिया गया है तथा लगभग इतने ही लोगों को घायल कर दिया गया है।

सूचना के अधिकार के आधार पर प्रकाशित एक खबर के अनुसार पिछले दो दशकों में बाघ, हाथी, तेंदुआ, सूअर व भालू इत्यादि जंगली जानवरों के हमलों में 1 हजार से अधिक लोग मारे जा चुके हैं तथा 5 हजार से अधिक लोग घायल हो चुके हैं।

जंगली जानवरों के आतंक के कारण जनता न तो अपने घरों में सुरक्षित है और न ही बाहर। केन्द्र व राज्य की भाजपा सरकार जनता को सुरक्षा देने व घायलों के सम्पूर्ण इलाज की गारंटी करने की जगह चंद रुपयों का मुआवजा देकर अपने कर्तव्यों की इति श्री कर ले रही है।

टाइगर, तेंदुआ, जंगली सूअर जैसे हिंसक जानवरों को वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1973 में संरक्षित सूची में रखा गया है परन्तु अब ये हिंसक जीव विलुप्त प्रजाति नहीं रह गये हैं बल्कि अब ये गांव-गांव, घर-घर घुस रहे हैं। जन-जीवन को बचानें के लिए इन हिंसक जानवरों से सुरक्षा का स्थाई इंतजाम किया जाना बेहद जरुरी है।

संयुक्त संघर्ष समिति पिछले लम्बे समय से वन्य जीवों से इंसानों, मवेशियों व फसलों की सुरक्षा को लेकर क्षेत्रीय स्तर पर आवाज उठा रही है। इसी तरह से उत्तराखंड के दूसरे क्षेत्रों में भी जनता जंगली जानवरों से सुरक्षा को लेकर संघर्ष कर रही हैं। अलग- अलग उठ रहीं इन आवाजों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए 11 फरवरी, 2024 (रविवार) को दिन में 11 बजे से, ग्राम कानिया, रामनगर जिला नैनीताल में जंगली जानवरों व बंदरों से सुरक्षा के सवालों को लेकर एक सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है। इस सम्मेलन में आप सादर आमंत्रित हैं।
निवेदक
ललित उप्रेती (संयोजक)
संयुक्त संघर्ष समिति
मो. 9012666340

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