बिंदुखत्ता में व्यक्तिगत विकास पर फिर छाया संकट: वन विभाग की रोक से स्थानीयों में आक्रोश
हल्द्वानी: बिंदुखत्ता क्षेत्र में व्यक्तिगत विकास कार्यों पर वन विभाग द्वारा लगातार लगाई जा रही रोक ने स्थानीय निवासियों में गहरी नाराजगी और दहशत पैदा कर दी है। ताजा मामला खैरानी स्थित एक वाटर पार्क का है, जहाँ वन विभाग की टीम ने संचालक को मौखिक रूप से पार्क बंद करने का आदेश दे डाला।
गोला रेंज के रेंजर ने फोन पर बताया, “हमें ऊपर से आदेश था, हमने वही किया।” हालाँकि, जब एसडीओ गौला से बात की गई तो उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में ऐसी कोई जानकारी ही नहीं है। अधिकारियों के बीच इस असमंजस ने लोगों की चिंता और बढ़ा दी है।
यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले गांधीनगर में बन रहे एक व्यावसायिक भवन को भी वन विभाग ने रोक दिया था, जिसे स्थानीय लोगों ने रातों-रात चोरी-छिपे पूरा किया। यह घटनाक्रम बताता है कि आखिरकार लोग अपने अधिकारों के लिए किस हद तक जाने को मजबूर हैं।

गौरतलब है कि वन अधिकार अधिनियम (FRA) 2006 के तहत बिंदुखत्ता को राजस्व गांव का दर्जा दिलाने की पत्रावली शासन स्तर पर लंबित है। स्थानीय लोग पीढ़ियों से यहाँ बसे हैं और उनकी यह माँग कानूनी तौर पर भी मजबूत मानी जाती है। लेकिन जहाँ एक ओर यह फाइल ठंडे बस्ते में पड़ी है, वहीं दूसरी ओर तराई पूर्वी वन प्रभाग के डीएफओ विकास कार्यों को रोकने के आदेश भेज रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है, “हम राजस्व गांव की राह देख रहे हैं, और वन विभाग हमारे अस्तित्व पर ही रोक लगा रहा है।” इस बीच, वन विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि बिंदुखत्ता अभी भी रिजर्व फॉरेस्ट के अंदर है, इसलिए शिकायत मिलने पर वे अपने क्षेत्र की सुरक्षा कर रहे हैं।
लगातार हो रही यह कार्रवाई ने यहाँ के लोगों में यह बात बैठा दी है कि शासन और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी के कारण उनके विकास को दरकिनार किया जा रहा है। एक तरफ़ कानून उन्हें अधिकार दे रहा है, तो दूसरी तरफ वन विभाग उन्हें अपनी ही ज़मीन पर निर्माण करने से रोक रहा है।
हालात यहाँ तक पहुँच गए हैं कि लोगों में यह डर बैठ गया है कि कहीं एक दिन वन विभाग उनके घरों को ही अवैध घोषित न कर दे। इसी दहशत और आक्रोश ने अब लोगों को संगठित करना शुरू कर दिया है। स्थानीय लोग अब चुप नहीं बैठेंगे। उनका कहना है कि अगर उनकी समस्या का जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो वे अब हल्द्वानी और देहरादून की सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर होगे।

अधिकारियों का दावा है कि वे शिकायत पर कार्रवाई कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि आखिर वही लोग शिकायत क्यों कर रहे हैं जो बिंदुखत्ता के विकास को नहीं देखना चाहते? फिलहाल, यह मामला प्रशासनिक असमंजस और कानूनी उलझन के बीच फंसा हुआ है। लेकिन जनता का आक्रोश अब सीमा पार कर रहा है। अब देखना यह होगा कि शासन- प्रशासन लोगों की इस दहशत और गुस्से को शांत करने के लिए क्या कदम उठाता है, या फिर यह मामला18 फरवरी से भी बड़े जनांदोलन का रूप ले लेता है।



